कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि वोडाफोन को कॉलर ट्यून या रिंगटोन के रूप में गाने उपलब्ध कराने के लिए इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी लिमिटेड (आईपीआरएस) के साथ समझौता करना आवश्यक है। अदालत ने संगीत रॉयल्टी से संबंधित कॉपीराइट विवाद में वोडाफोन आइडिया लिमिटेड की अपीलों को खारिज कर दिया। यह विवाद वोडाफोन की मूल्यवर्धित सेवाओं से संबंधित था, जिनमें कॉलर ट्यून और रिंगटोन शामिल हैं।

आईपीआरएस से अलग लाइसेंस लेना आवश्यक

दूरसंचार ऑपरेटर ने तर्क दिया था कि उसने संगीत लेबल सारेगामा इंडिया लिमिटेड के साथ समझौतों के माध्यम से अधिकार प्राप्त कर लिए हैं और इसलिए वह मूल साहित्यिक और संगीत रचनाओं के लिए आईपीआरएस को अलग से रॉयल्टी का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने एकल जज के पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए 8 मई को फैसला सुनाया कि जब भी मूल संगीत और साहित्यिक रचनाओं को व्यावसायिक रूप से जनता तक पहुंचाया जाता है, तो आईपीआरएस से अलग लाइसेंस लेना आवश्यक है। 

रॉयल्टी का दावा करने की अनुमति मिली

आईपीआरएस ने कहा कि वह पूरे भारत में 22,000 से अधिक संगीत और साहित्यिक कृतियों के लेखकों, संगीतकारों और प्रकाशकों का प्रतिनिधित्व करता है। पीठ ने कहा कि कॉपीराइट अधिनियम में 2012 के संशोधनों ने साहित्यिक और संगीत अधिकारों के स्वामियों के अधिकारों में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। अब उन्हें संरक्षण प्राप्त है और ध्वनि रिकॉर्डिंग में शामिल उनकी साहित्यिक और संगीत कृतियों के उपयोग के लिए रॉयल्टी प्राप्त करने का अधिकार है। 

पीठ ने कहा कि संशोधनों से आईपीआरएस को ध्वनि रिकॉर्डिंग में संगीत और साहित्यिक कृतियों के संबंध में रॉयल्टी का दावा करने की अनुमति मिलती है, जब ऐसी ध्वनि रिकॉर्डिंग का व्यावसायिक रूप से उपयोग किया जाता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि वोडाफोन और सारेगामा के बीच हुए समझौते आईपीआरएस के अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकते।

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